मेरा पहला Valentine - ||
तुम्हें लेने के लिए मैं घर से निकला बहुत सवाल थे दिल मे और सबसे बड़ा सवाल ये था कि बात कहाँ से शुरू करूंगा, इन ख्यालों के साथ तुम्हारे घर तक मैं पहुच गया | हाथों में फूल लिए जैसे ही मैंने तुम्हारी door bell बजाई,
लाल रंग की dress में खुले बालो को(जो अब भी थोड़े गीले थे) हाथो से झटकटे हुए जब तुम्हें देखा तो मैं दंग रह गया, हाथों की पकड़ फूलो पर हल्की हो गयी, माथे पर पसीने की बूँदे आ गई | इतने पर सामने से तुमने मुस्कुरा कर कहा
तुम :-'आओ अंदर आओ और बैठो मैं बस अभी आयी' |
मैं :- जी बिल्कुल, ये खूबसूरत फूल तुम्हारे लिए मेरी तरफ से...
तुम :- ओह.... Thank you...
मैं :- आज कोई बहुत खूबसूरत लग रहा है...
तुम :- (मुस्कुराते हुए) अच्छा जी, बैठो तुम चाय तो नहीं पीते तो कॉफी ले आउ थोड़ी सी तुम्हारे लिए?
मैं :- नहीं नहीं ठीक है... बस थोड़ा पानी ले आओ...
जब तुम पानी का गिलास लेकर आए मानो जैसे एक अलग एहसास हुआ जो पहली बार था...
तुम :(अपने hair dryer को बंद करते हुए) चलो मैं त्यार हूँ...
मैं :- हाँ हाँ चलो... (कुर्सी से उठ कर)
जब तुम मेरी गाड़ी के करीब आयी तो कुछ अलग एहसास हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ यूँ तो इस गाड़ी मे पहले भी बहुत बार बैठ चुके हो तुम पर इस बार का एहसास कुछ अलग है, जैसे ही तुम बैठे हमने चलना शुरू किया, और इसी के साथ तुम्हारा प्यारा सा पहला सवाल
तुम :(मेरी तरफ देखते हुए) हम कहाँ जा रहे हैं?
मैं :(सामने देखते हुए) बस एक जानी पहचानी जगह
तुम :- ये black shirt अच्छी लग रही है तुम पर...
मैं :- thanks पर तुम ज्याद खूबसूरत लग रहे हो इस red dress में...
गाड़ी रोकते हुए मैंने कहा लो आ गए, तुम्हारे उतरने से पहले जब मैं तुम्हारी ओर का दरवाज़ा खोलने बढ़ा उस से पहले ही तुम बोल पड़े,
तुम :- C. P ही आए हैं न हमारी वो जगह जहाँ हम हमेशा स्कूल टाइम से आ रहे है...
मैं :- (सर पर अंजान बन हाथ फेरते हुए मुस्कुरा कर) हाँ...
तुम :- चलो आओ चले ऊपर....
मैं :- चलो चले....
(दरवाज़ा खोल हम साथ बैठे उस resturant में, सब कुछ पहले जैसा ही था पर अब जास्बत अलग थे शायद वो साल बचपन के थे मगर ये पल जवानी का है, table पर बैठते हुए)
मैं :- पहले कुछ order कर देते हैं फिर बात करेंगे |
तुम :- (मुझ पर हस्ते हुए) जरूर तुम बैठो तो सही पहले...
मैं :- (खुद पर हस्ते हुए) हाँ बैठ जाता हूँ पहले....
तुम :- अच्छा तुम क्या लोगे बोलो?
मैं :- White sauce pasta with extra chilli flakes and a mango shake with butterscotch ice cream.
तुम :- अच्छा, ठीक है मैं लूंगी... Non veg Momoes with the cream and gulabjamun as a dessert...
मैं :- तुम्हें आज भी मेरा order याद है...
तुम :- वैसे ही जैसे तुम्हें मेरा याद है...
(Waiter order लेकर वहाँ से चला जाता है)
तुम :- आज Valentine Day पर तुम्हें क्या याद आ गया जो कहना है?
मैं :- बताता हूँ पर उस से पहले तुमसे कुछ पूछना चाहता हूँ...
तुम :- पूछो क्या पूछना चाहते हो...
मैं :- (बाहर की ओर देखते हुए) तुम्हें याद है हम पहली बार यहां कब आए थे?
तुम :- हाँ जब हम 10th में थे और मैं अपने birthday पर तुम्हारे साथ आई थी यहा अपना birthday celebrate करने के लिए... 27 Oct. 2012 में...
मैं :- तुम्हे ये याद है क्या तुम्हें याद है हम बचपन मे कितनी शरारत करते थे...?
कभी आम के पेड़ से आम तोड़े तो कभी जामुन के पेड़ से जामुन...
तुम :- कभी home work के डर से एक दूसरे के घर भाग कर आ जाते थे कभी एक दूसरे की शिकायत लगाते थे...
मैं :- class में हम कागज़ पर लिख कर बात करते थे और exam में एक दूसरे को अपनी sheet pass करते थे...
तुम :- (ज़ोर से हस्ते हुए) हाँ और 12th में इसलिए ही पीटे थे जब कागज़ पर लिख कर बात करते वक़्त टीचर ने वो कागज़ देख लिया था हमारा...
मैं :- तुम डॉक्टर बनना चाहते थे और मैं टीचर ...
तुम :- और मैं तुम्हें science पढ़ाती थी और तुम मुझे maths...
मैं :- हाँ college में हम एक दूसरे पर कितना उधार रखते थे... आज तुम पैसे दोगे कल मैं...
तुम :- हाँ और तुम हमेशा कॉफ़ी ही पीते थे और मैं चाय...
मैं :- तुम्हें तो हमेशा से किसी डॉक्टर से शादी करनी थी...
तुम :- तुम भी तो एक business woman से करना चाहते थे...
मैं :- हाँ वो तो मेरा बचपना था...
तुम :- और वो मेरा...
(Waiter order लेकर आता है और हमारे order हमारे सामने रखता है)
मैं :- चलो थोड़ा खा लेते हैं पहले...
तुम :- हाँ जरूर तुम इतने बड़े foodie जो हो...(मेरी ओर देख हस्ते हुए) खाना देख तुम रुकते ही नहीं...
मैं :- (तुम्हें देख हस्ते हुए) हाँ हाँ पर तुम भी तो एक foodie ही हो मेरी ही तरह...
(खाना खतम होने के बाद)
तुम :(एक tissue मेरी ओर बढ़ाते हुए) तुम आज भी खाना अपनी शर्ट पर गिरा देते हो...
मैं :- (मुस्कुरा कर tissue लेते हुए) हाँ, (एक tissue देते हुए) वैसे ही जैसे तुम खाने को अपने मुँह पर लगा लेते हो...
तुम :- (tissue paper लेते हुए) अच्छा कहाँ लगा है?
मैं :- (मुस्कुरा कर) left side under lips....
तुम :- साफ हो गया?
मैं :- (अपने शर्ट से दाग हटा तुम्हारी ओर देखते हुए) हाँ जी... हो गया...
तुम :- कितनी अजीब आदते हैं न हमारी जो अब तक नहीं बदली...
मैं :- कुछ आदते बदलती नहीं कभी...
तुम :- जैसे दोस्ती निभाने की हमारी ये आदत...
मैं :- बिल्कुल... अच्छा एक बात पूछू तुमसे?
तुम :- (मेरी ओर देखते हुए) हाँ पूछो...
मैं :- मैं तुम्हें 7th class से जानता हूँ स्कूल और कॉलेज हम साथ पढ़े. तुम इतनी खूबसूरत हो, कितने लड़के तुम्हें अपना crush बताते थे पर फिर भी तुम आज तक single हो क्यूँ??
तुम :- मैं भी तो तुम्हें 7th से जानती हूँ, तुम भी कुछ कम handsome नहीं... काफी लड़कियाँ तुम्हें भी like करती थी फिर तुम क्यूँ single हो??
मैं :- (थोड़ा शांत हो कर) शायद मुझे किसी का इंतज़ार था...
तुम :- (मुंह नीचे कर हस्ते हुए धीमी आवाज़ में) हाँ शायद मेरा...
मैं :- (चौक कर) क्या कहा तुमने?
तुम :कुछ नहीं, मैंने कहा शायद मुझे भी किसी का इंतज़ार था..
मैं :- तो इंतज़ार खतम करते हैं मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं और वो ये है कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ... अब से नहीं 7th से ही.... कई बार सोचा कह दु पर हिम्मत नहीं जुटा सका...इन आठ सालो में...
तुम :- कितनी देर लगा दी तुमने ये बात कहने मे मैं तो तब ही जान गयी थी जब तुम जान बूझ कर फैल होकर मेरी क्लास में आए थे सिर्फ मेरे साथ पढ़ने के लिए... मेरा 10th में दिया रुमाल अब भी साथ रखते हो, मुझे black पसंद है तो ये black shirt पहन कर आए हो... मेरी हर बात को डायरी में लिखते हो मगर यह कहने मे आठ साल लगा दिये तुमने... मुझे पता था एक न एक दिन तो कहोगे ही और इसलिए इंतज़ार तुम नहीं मैं कर रही थी तुम्हारा... (मेरी ओर देख मुस्कुराते हुए) समझे पागल ?
मैं :- और मैं सोच रहा था कि तुम मुझे सिर्फ अपना एक अच्छा दोस्त समझती हो... (खुद पर हस्ते हुए) सच में इंतज़ार तो तुम कर रहे थे...
I love you...
तुम :- (मुझे गले लगाते हुए) Love you too... पागल...
The End
तो दोस्तो ये एक छोटी सी कहानी थी 'मेरा पहला Valentine' उम्मीद करता हूँ आप सबको पसंद आएगी और आप इसे अपने प्यार के साथ जरूर बाटँगे और इसे पढ़ कर अपने प्यार के पलो को भी जरूर याद करेंगे...
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